Sunday, 28 April 2013

मैं मजदूर हूँ 


 मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ 
       तब भी मैं सकुन में हूँ            
शहर के हर घर की ईट में मैं मौजूद हूँ 
  क्या हुआ मेरा आशियाना है  नहीं 
दुसरो की आशियाना बनाने में सक्षम हूँ 

मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ 

गर्मी हो या सर्दी हो हर वक्त मैं मजूद हूँ 
दिहाड़ी ज्यदा हो या कम हो मुझमे सकून हूँ 
क्योकि मैं ईमानदारी व मेहनत की खाता हूँ 
 दुसरो के टुकड़ो पर जीने वाला नहीं हूँ 

मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ 

जाओ उस भगवान् से कह दो 
अगले जन्म में मुझे फिरसे मजदूर बनाना 
क्योकि मैं कोई चोर-कातिल नहीं हूँ 



 मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ 
     तब भी मैं सकूँ में हूँ क्योकि            
शहर के हर घर की ईट में मैं मौजूद हूँ 

                                                                       
                                                                                   Written by-Ritesh Mishra

Sunday, 14 April 2013

शायरी




परवाने को कौन समझाये,
शमां सिर्फ जलाती है।
यु तू हम खुद को भी न रोक पाये,
उस रह पर जाने से, 
जहां महबूब सिर्फ दिल जलती है।।

                                                   रचना- रितेश मिश्रा 

मैं दीवाना




मैं दीवाना मस्ताना तेरा नैनो का, 
तू फुलो की रानी, मैं राजा भौंरों का,


मैं मदहोश भौंरों तेरी जवानी का, 
आजा पास एक बार तू, क्या ठिकाना जिंदगी का ,


तू स्टेरिंग बनजा, मेरी जिंदगी का, 
तू जिधर मोड़ दे, मैं उधर को चल दू,

यह मन है दीवाने का। 

                                                         रचना- रितेश मिश्रा 

                 

Friday, 5 April 2013

दोहा

 

चलता माइक्रोवेव देख कर रितेश दिहिस रोये। 
इस चौखानटे डिब्बे में ठंडा बचा न कोये।।


                                                 Written By-रितेश मिश्रा (विश्वास)


Wednesday, 3 April 2013

आज तू मुझसे कितना दूर,मैं तुमसे कितना दूर ,



आज तू मुझसे कितना दूर,मैं तुमसे कितना दूर ,
इस दिल के अरमां , आज कितने है तुमसे दूर ,
न तुमने समझा , न मैंने समझा ,
न समझ पाया दिल 
ये अरमां  है, जो निकल रहे है अश्को से,
आज तू मुझसे कितना दूर,मैं तुमसे कितना दूर ,

मैंने हर रीति तुझसे निभाई , 
फिर भी हमारे बीच क्यों आई जुदाई ,
न तुमने समझा , न मैंने समझा ,
मेरे हर लब पर तेरा नाम है ,
मेरे हर अश्क पर तेरा नाम है ,
आज तू मुझसे कितना दूर,मैं तुमसे कितना दूर ,

                                                          रचना- रितेश मिश्रा (विश्वाश )