हार के जीतने में जो मजा है वो किसी में नहीं ...........
Sunday, 14 April 2013
शायरी
परवाने को कौन समझाये,
शमां सिर्फ जलाती है।
यु तू हम खुद को भी न रोक पाये,
उस रह पर जाने से,
जहां महबूब सिर्फ दिल जलती है।।
रचना- रितेश मिश्रा
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