मैं मजदूर हूँ
मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ
तब भी मैं सकुन में हूँ
शहर के हर घर की ईट में मैं मौजूद हूँ
क्या हुआ मेरा आशियाना है नहीं
दुसरो की आशियाना बनाने में सक्षम हूँ
मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ
गर्मी हो या सर्दी हो हर वक्त मैं मजूद हूँ
दिहाड़ी ज्यदा हो या कम हो मुझमे सकून हूँ
क्योकि मैं ईमानदारी व मेहनत की खाता हूँ
दुसरो के टुकड़ो पर जीने वाला नहीं हूँ
मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ
जाओ उस भगवान् से कह दो
अगले जन्म में मुझे फिरसे मजदूर बनाना
क्योकि मैं कोई चोर-कातिल नहीं हूँ
मजबूर हूँ इसलिए आज मैं मजदूर हूँ
तब भी मैं सकूँ में हूँ क्योकि
शहर के हर घर की ईट में मैं मौजूद हूँ
Written by-Ritesh Mishra
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