हार के जीतने में जो मजा है वो किसी में नहीं ...........
Friday, 14 February 2014
जल बिन मैं जल गई
जल बिन मैं जल गई,
एक जल से पीड़ा भई,
एक जल से निर्मल हुई,
कृति रितेश मिश्रा
1 comment:
कविता रावत
4 September 2015 at 07:35
दवा एक मर्ज अनेक
बहुत सुन्दर
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दवा एक मर्ज अनेक
ReplyDeleteबहुत सुन्दर